या तो कुछ बहतर होता है,
या कुछ खराब,
Exactly वो नहीं होता जो आप सोचते हैं.
आप सिर्फ करम कर सकते हो और फिर जीवन उस कफल देता है अक्सर वो नहीं होता जो हम सूचते हैं लेकिन जो होता है वो उससे बहतर होता है जो हम सोचते हैं.
Namaste.
जीवन घटता है। जीवन को आप कंट्रोल में नहीं कर सकते now isn't that powerful हम अक्सर जीवन में जो सूचते हैं,
जो उमीद रखते हैं,
जो कल्पना करते हैं.
वैसा नहीं हो था.
अब ये सुनकर शायद आपको ऐसा लगे कि ऐसा तो नहीं है। बहुत बार ऐसा भी होता है कि जो आप सोचते हैं उससे बहतर रिजल्ट साते हैं। ग्जाक्ली या तो कुछ बहतर होता है,
या कुछ खराब,
Exactly वो नहीं होता जो आप सोचते हैं और वैसे भी कुछ बहतर होना या कुछ खराब होना आपकी अपिक्षाओं के उपर निर्धारित करता है परिनाम,
रिजल्ट्स जो होते हैं वो होते हैं लेकिन हमारी अपेक्षाय निर्धारित करती हैं कि वो हमें बहतर लगते हैं कि हमें खराब लगते हैं किसी के लिए 40% marks भी बहुत अच्छे होते हैं और किसी के लिए 90% भी कम.
क्या आपने महसूस किया है कि शाम को पार्टी है। आप उसके लिए बहुत excited हो। शाम को पाटी में जाते हो,
लेकिन बोर हो जाते हो.
या फिर आपको लगता है कि इस बार तो आपकी प्रमोशन पकी है दुनिया की कोई ताकत आपकी प्रमोशन नहीं रोक सकती.
लिकिन प्रमोशन नहीं मिलती या आपको लगता है इस बाहर तो आपकी काम की तारीफ आपके बॉस या आपकी वाइफ आपके हस्बंट जरूर करेंगे लेकिन नहीं मिलती या हो सकता है उल्टा हो आपको लगता है जूते पढ़ने वाले हैं लेकिन आपको बहुत तारीफ मिलती है जीवन घटता रहता है अब क्या इसका मतलब ये है कि आपको कोई planning नहीं करनी,
आप कोई करम नहीं करोगे,
या फिर आप कोई उमीद ना रखो,
90% के लिए ट्राइ भी ना करो,
प्रमोशन के लिए महनत भी ना करो.
आप सिर्फ करम कर सकते हो और फिर जीवन उसका फल देता है अपने आप देता है और आप पाएंगे कि अक्सर लॉंग टम में जीवन जो भी फल देता है वो आपके लिए अच्छा ही होता है कुछ साल पहले एक वरक्शॉप के दोरान हमने एक सर्वे किया,
लाइव सर्वे.
उसमें जो ज्यादतर participants थे,
वो 35 से 45 साल की उमर के थे.
हमने participant से पूछा कि 10 साल पहले आपकी कुछ expectations होंगी,
कुछ अपेक्षाएं होंगी,
कुछ अकांक्षाएं होंगी,
कुछ उमीद होंगी.
कि जीवन ऐसा होना चाहिए कि मेरे पास घर होगा,
मैं शेहर में रहूँगा,
मैं इस देश में रहूँगा.
मेरा इतना बड़ा परिवार होगा,
मैं यहाँ पर काम कर रहूंगा। तो जो भी आपने सोचा,
और अब 10 साल बाद क्योंकि वो 10 साल बीत गए हैं तो कि आवे सा हुआ 82% 82% लोगों ने बोला कि जो उन्होंने सूचा था वैसा नहीं हुआ exactly वैसा नहीं हुआ.
अब हमने दूसरा सवाल पूछा.
कि आप फिर से 10 साल पहले जाएए और आपने जो भी सोचा था कि आपकी जीवन की ऐसी quality होगी तो क्या आपकी expectations के हिसाब से आपकी जीवन की quality खराब है जैसी आपने सोची थी?
वैसी ही है जैसी आपने सोची थी या बहतर है इस्पार.
91% 91% लोगों ने बोला कि उनकी जीवन की quality,
जैसी उनोंने सूची थी,
उससे बहतर है। इसके results बहुत powerful थे इसमें एक बहुत गहरा सूत्र छुपा हुआ है Akser वो नहीं होता जो हम सोचते हैं लेकिन जो होता है वो उससे बहतर होता है जो हम सोचते हैं.
जीवन घटता है,
जीवन बहता है.
जीवन को हम कंट्रोल नहीं कर सकते। लेकिन हमारे जादत हर लोगों की जिन्देगी,
कोशिश,
जीवन को कंट्रोल कंट्रोल कंट्रोल करने में लगी रहती है और जीवन हाथों से फिसलता रहता है एक छोटी से exercise करते हैं कल शाम को याद कीजिए। या कल दिन को याद कीजिए। क्या आपका कल जो बीट गया कल की शाम कल का दिन वैसा ही गुजरा जैसे आपने सूचा था अलग-अलग घटना है जो आपने कुछ सोची होंगी सुबह कि ऐसा दिन गुजरेगा क्या आप निश्चित रूप से कहे सकते हैं कि आने वाला दिन,
आने वाली शाम वैसी ही होगी.
जैसी आप कल पना करते हैं जैसी अब की उमीद है साल खतम होने को आया है। हर साल हम कुछ न कुछ सोचने के इस साल हम ये करेंगे,
वो करेंगे,
ये छोडेंगे,
ये पाएंगे। क्या साल वैसा ही गुजरा जैसा आपने सोचा था या कुछ भिन भिन घटना है घटी और घटनाओं के जो परिणाम थे कुछ बहतर थे कुछ खराब थे जीवन घटता है। जीवन को हम control नहीं कर सकते। अजब हम जीवन के साथ जुड़ते हैं इसकी ले में चलते हैं.
तो एक आराम होता है,
एक सहचता होती है,
एक विश्राम होता है.
लीला होती है Otherwise हम जूचते रहते हैं,
जूचते रहते हैं,
जूचते रहते हैं,
हमारा control छूटता नहीं है.
और इसिको.
साक्षी भाव से जीना कहा गया है,
यही गीता का सार है,
यही परमात्मा की भक्ती है.
यही करम मार गे यही धियान मार गए दिहान और कुछ भी नहीं है.
कि ये भी हो सकता है ये सुनते हुए आपके अंदर का कर्मत व्यक्ति बहुत विरोध महसूस करे उसको यह सूत्र बाद डिप्रेसिंग लगे यह आपका एहंकार है जो विरोध कर रहा है जिसे लगता है कि मैं हूँ जो जीवन को चलाता है एक कहानी याद आ गई,
बड़ी प्यारी और मज़ेदर कहानी है। एक बार एक हाथी पुल को पार कर रहा था उसके उपर चीटी बैठी होई थी। हाथ ही जब पुल को क्रॉस कर रहा था तो पुल हिल रहा था हाती के बार से। जब हाथी ने पुल को क्रॉस कर दिया,
तो चीटी हाथी को बोलती है,
देखा बेटा,
कैसे मैंने पूरे पुल को हिला दिया?
हमें ऐसे लगता है कि जीवन को हम कंट्रोल कर रहे हैं.
इसमे इसूतर में एक liberation है एक freedom है इद प्रेसिने है.
इसको समझना नहीं है। इसको जानना है कि कैसे हम जीवन को कंट्रोल करते रहते हैं लेकिन नहीं कर पाते और नहीं कर पाने के बाद एक दुख होता है एक असहजता होती एक कश्ट होता है एक संघर्ष होता है तो जब हम चुड़ते हैं,
तो अराम होता है प्रेम होता है तो इसके उपर मनन कीजिए,
इसको देखिए,
अगर आपको ये बात ठीक नहीं लग रही है,
तो इसको अपने पास रख लीजिए.
ना तो इसका विरूद कीजिए ना इसको अपनाईए जब तक ये आपको आपके लिए प्रकट नहीं होती तो मेरी परमात्मा से परार्तना है। कि जीवन के घटने में आप ना घटें बलकि फैलावट और मिठास महसूस करें नमस्ते