आज मैं आपसे एक बहुत महत्कपून सवाल पूछना चाहता हूँ आप कितने जमिदार हैं और आप किस किस चीज के लिए जमिदार हैं कुछ लोग कहेंगे मैं अपने परिवार के लिए जमिदार हूँ और कुछ लोग कहेंगे मैं अपने सोसाइटी,
अपने शहर या अपने देश के लिए जमिदार हूँ लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो यह कहेंगे कि मैं पूरे ब्रमाण्ड के लिए जमिदार हूँ और शायद यह सब आपको अजीब लगे लेकिन सचाई यही है और उससे पता भी नहीं चलता अब बताईए आप क्या करेंगे जाधर तर लोग कहेंगे मैं उठाकर उससे वापस कर दूँगा लेकिन कुछ लोग यह भी सोच सकते हैं यह उसकी जमिदारी है,
मेरी नहीं अगर आप उससे इगनोर कर देते हैं तो भले ही आप आगे बढ़ जाएं लेकिन वो त्रिश आपके दिमाग में घूमता रहेगा उसमें कितने पैसे हो रहे होंगे,
कोई गलत इस्तुमाल तो नहीं करेगा मुझे उससे वापस कर देना चाहिए था या नहीं और ये विचार आपको अंदर से परिशान करते रहेंगे लेकिन अगर आप वही वॉलेट उठा कर लोटा देते हैं तो क्या होगा?
आपके अंदर से सुकून पैदा होगा,
एक खुशी पैदा होती है और सामने वाले के दिल में आपके लिए आभार और प्रेम पैदा होता है अब एक और एधवरन लेते हैं मान लिजे आप अपने बच्चे के साथ पार्क में घूमने गए हैं और आपको जमीन पर किसी बच्चे का बैट पढा मिला आपको आजपास कोई नहीं दिखाई दे रहा है अब आपके पास दो रास्तें हैं या तो आप उसे इगनोर कर दें या फिर जमयदारी लेकर उसे सही जगा तक पहुचाने की कोशिश करें इसमें आप गार्ड को दे दें या सुसाइटी ग्रूप में फोटो डाल दें या किसी सुरक्षित चगह पर रपतें बस इतना ही काफी है और जब वो बच्चा या उसके माता पिता को वो वैक वापस मिलेगा तो जो खुशी उन्हें मिलेगी वही खुशी आपके दिल में भी आईगी यही है जिम्मिदारी का असली मतलब जिम्मिदारी का मतलब यह नहीं है कि आप सब कुछ अपने सिर पर उठा लें जिम्मिदारी का मतलब यह है कि आप जितना कर सकते हैं वहाँ उतना प्रेम और सम्वेदना से करें सड़क पर कोई खायल जानवर दिख जाए आप उसे घर नहीं ले जा सकते लेकिन आप क्या कर सकते हैं?
किसी NGO को कॉल कर सकते हैं?
थोड़ा खाना या पानी दे सकते हैं किसी सुरक्षित जगा पर उसे बैठा सकते हैं बस यही काफी है जब आप ऐसा करते हैं तो आपके अंदर क्या पैदा होता है?
प्रेम,
करुडा,
आभार और आत्मिविश्वास और यही आत्मिविश्वास आगे चल कर आपको जिन्दगी में सफल वनाता है क्योंकि जो लोग कहते हैं मैं कुछ नहीं कर सकता वो अक्सर वही लोग होते हैं जिनके अंदर आत्मिविश्वास कम होता है और जो लोग सफल होते हैं वो कहते हैं हाँ मैं यह कर सकता हूँ अब एक पहुत छोटा घुरेलू उदारन देता हूँ मेरी वाइफ के कार में पेट्रोल भरवाने के जमेंदारी मेरी है जैसे ही पेट्रोल कम होता है मैं खुद जाकर भरवा लेता हूँ कोई शिकायट नहीं,
कोई गुस्सा नहीं क्यूं?
क्योंकि मैं इसे बोज नहीं मानता प्रेम से निपाई गई जमेंदारी मानता हूँ मेरी पत्नी की जमेंदारी है कि हर महने रेंड भेजना लेकिन मैं फिर भी उन्हें रिमाइंड करता हूँ क्यूं?
क्योंकि मैं मदद करना चाहता हूँ उन्हें पर बोज नहीं डालना चाहता हूँ और इससे रिष्टे में और प्रेम बढ़ता है तो जमेदारी बहर से थोपी गई चीज नहीं है जमेदारी प्रेम से पैदा होती चीज है जब आप ये मान लेते हैं कि मैं जीवन के लिए जमेदार हूँ मैं अपने रिष्टों के लिए जमेदार हूँ मैं अपने समाज के लिए जमेदार हूँ मैं पूरे ब्रह्माण के लिए जमेदार हूँ तो आपके अंदर,
अपने आप,
प्रेम,
आभार,
आत्मविश्वास और शान्ती पढ़ने लगती हैं और फिर एक दिन आप कहेंगे मैं कुछ भी अचीव कर सकता हूँ धन्यवाद