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ऑफिस और घर का तनाव कैसे खत्म करें |

by Rajat Kumar Agrawal

Type
talks
Activity
Meditation
Suitable for
Everyone

इस reflective talk में मैं एक सच्ची-सी कहानी के माध्यम से यह समझाने की कोशिश करता हूँ कि तनाव बाहर की परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारे अपने मन से पैदा होता है। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी के ज़रिए हम जानेंगे कि ऑफिस का प्रेशर, बॉस की उम्मीदें, कलीग्स की राजनीति और घर की ज़िम्मेदारियाँ — ये सब होते हुए भी शांति कैसे पाई जा सकती है। यह session आपको सिखाएगा: • तनाव का असली कारण क्या है • बाहरी प्रेशर का असर अपने मन पर कैसे कम करें • अपने भीतर शांति और संतुलन कैसे बनाए रखें यह talk उन सभी के लिए है जो काम, परिवार और ज़िंदगी के दबाव में कहीं न कहीं शांति खो चुके हैं। शांति बाहर नहीं मिलती… शांति भीतर पैदा करनी पड़ती है।

Stress ManagementWork Life BalanceInternal PeaceSelf ReflectionMindfulnessWorkplace Stress ManagementFamily ExpectationsPeace CultivationStress Identification

Transcript

कल मेरी बात एक सच्जन से हुई मिस्टर ऐयर एक मुल्टी नेशनल कंपनी में सौफ्टेवर इंजीनियर है बाहर से देखने में एकदम सफल,

अच्छी नौकरी,

परिवार,

सब कुछ ठीक लेकिन बाचीत के कुछी मिन्टों में उन्होंने कहा सर,

मेरी जिंदिगी में बहुत ज़्यादा टेंशन है आफिस हो या घर,

कहीं भी शांती नहीं मिलती मैंने उनसे बहुत शांती से पूछा आपको क्या लगता है,

ये टेंशन क्यों है?

वो बोले,

आफिस में बॉस काम पर काम दिये जाते है तारीव बहुत कम मिलती है कलीक्स हमेशा टांग खींचने का मौका दूनते रहते हैं कहीं मेरी गल्ती निकल आए और वो आगे बढ़ जाए कुल मिलाकर आफिस का मौहाल ही बहुत नीगेटिव है फिर मैंने पूछा,

और घर में?

वो थोड़ी देर ठक कर मुस्कुराय और बोले घर में भी चैन नहीं है सर बीवी की उम्मीदें बहुत जादा हैं रोज कोई ना कोई काम बच्चे कुछ ना कुछ मांगते रहते हैं ये चाहिए,

वो चाहिए इतनी सारी डिमांड मैं कैसे सब पूरा करूँ?

तब मैंने उनसे एक बहुत जरूरी सवाल पूछा क्या आपने कभी सोचा है कि ये टेंशन बाहर से आती है या अंदर से पैदा होती है?

वो थोड़ी देर चुप रहे मैंने आगे पूछा,

आपके जो दोस्त हैं क्या वो भी इतने टेंशन में रहते हैं?

उन्होंने कहा,

नहीं,

वो तो हमेशा खुश दिखते हैं तो मैंने पूछा,

फिर आपके साथ ऐसा क्या अलग हो रहा है?

वो बोले,

ऐसा कुछ खास अलग तो नहीं?

और वहीं उन्हें पहली बार ऐसास हुआ कि शायद ये टेंशन उन्होंने खुद अपने दिमाग में बना लिए देखिए,

हर जॉब में प्रेशर होता है हर बास को expectation होती है हर क्लाइन्ट जादा चाहता है और घर में बतनी और बच्चों की आपसी उमीदे तो होंगी ही आखिर वो आपसे नहीं करेंगे तो किस से करेंगे लेकिन असली सवाल ये है इन सब बातों का असर आपके दिमाग पर कितना पढ़ रहा है बाहर की दुनियां हमिशा कुछ ना कुछ कहेगी कोई तारीफ करेगा,

तो कोई अलोजना भी करेगा कोई अच्छा बोलेगा,

तो कोई बूरा भी बोलेगा लेकिन टेंशन तब पैदा होती है जब हम उन बातों को अपने अंदर बैठा लेते हैं मैंने मिस्टर आयर से कहा आप पॉस को इग्नोर नहीं कर सकते क्लाइन्ट को इग्नोर नहीं कर सकते घर में पतनी और बच्चों को भी इग्नोर नहीं कर सकते इग्नोर करना समाधान तो नहीं है समाधान यह है कि जो कुछ बाहर हो रहा है उसका जहर अपने दिमाग में ना घुसने दें काम करें,

रिष्टे निभाए,

जिम्मिदारिया पूरी करें लेकिन अपने मन्त की शान्ती की जिम्मिदारी खुद लें मैंने उनसे कहा,

आप रोज थोड़ा समय अपने लिए निकाला करें अंदर की शान्ती को पहचानना होगा ध्यान,

That is meditation,

आत्म चिंतन अपने आप से ये पूछना कौन सी बातें मुझे शान्त करती हैं?

कौन सी आदितें मुझे हलका महसूस कराती हैं?

धीरे धीरे आपके आंदर से ही आवाज आईगी ये करो,

तुम्हें टेंशन नहीं होगी और यही असली रास्ता है,

टेंशन फ्री और बरी फ्री जीवन का

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Rajat Kumar AgrawalNoida, Uttar Pradesh, India

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