10:43

(भक्ति माता के पुत्र: ज्ञान और वैराग्य की अमर कथा)

by Shubham Sen

Rated
5
Type
talks
Activity
Meditation
Suitable for
Everyone
Plays
1

"भक्ति जब परिपक्व होती है, तो जन्म देती है दो दिव्य पुत्रों को – ज्ञान और वैराग्य को। यह कथा हमें याद दिलाती है कि भक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि एक क्रियाशील शक्ति है जो भीतर से रूपांतरण लाती है। इस सुंदर प्रवचन में जानिए: • भक्ति माता का प्रतीकात्मक अर्थ • ज्ञान और वैराग्य का वास्तविक स्वरूप • जीवन में संतुलन और सच्चे उद्देश्य की ओर कैसे बढ़ें हर दिन थोड़ी-सी भागवत कथा, आपके अंतर्मन को जाग्रत कर सकती है। इस कथा के माध्यम से अपने भीतर के सत्य को अनुभव कीजिए।"

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Transcript

राधे राधे आप सबी को जैसा कि हमने हमारे पिछले एपिसोट में जाना था शुगदेव जी महाराज का कथा सुनाना प्रारंब करना और देवताओं का आना और अमरित वापस लौटा देना शुगदेव जी महाराज के द्वारा आईए अब हम हमारी कथा में आगे बढ़ते हैं नारत जी की समस्या सुनकर सनकादी हसने लगे और नारत जी इतनी सी बात को लेकर तुम इतने परिशान हूँ बिलकुल चिंता छोड़ो हम तुम्हें समाधान देंगे माम चिंता कुरुदे वर्षे हर्ष चिते समाभः उपायह सुख साध्योत्र वर्तते पुर्व एवही नारत जी ने कहा कौन सी उपाय आपके पास हैं सनकादी बोले अरे भाई सरल उपाय वो है श्रीमद भागवतम जाव्यम शोक दूख विनाशनम शुग देव जेसे परमहंस के द्वारा गाया हुआ श्रीमद भागवत ही वह अमरत है जिसका पान करते ही ज्यान वेरात नव योवन संपन होकर नाचेंगे एवं हमारा विश्वास है नारत जी फिर मुँ लटका लिए सनकादी बोले अरे तुमारा मुक अभी भी लटका हुआ है क्या बात है नारत जी ने कहा हमें आपकी बातों में जरा संदेह हो रहा है सनकादी बोले कैसा संदेह है भाई नारत जी ने कहा मैंने उसे उपनिशर सुना दिया वेद सुना दिये पर कोई फाइदा नहीं हुआ तो मैं जानना चाहता हूँ भागवद में इसी क्या विशिष्टा है कि उन्हें लाब मिलेगा वेद वेदांत सर्वोपरी है मैं भागवद को भी जानता हूँ उसमें भी वेद का समावेश है सनकादीयों ने कहा दूद से ही घी निकलता है पर जो काम घी करेगा वो दूद नहीं कर सकता गन्ने के रस से ही शक्कर बनती है पर जो काम शक्कर कर सकती है वो गन्ना नहीं कर सकता इसलिए वेद है दूद तो भागवद उसी का सार्व तत्व है वेद है व्रक्ष तो भागवद है उसी का फर इसप्रगार सनकादियोंने अनेक द्रस्तांत देकर नारत जी को समझाया अब तो नारत जी भी गत-गत होगर कहते हैं हे महत्मन अब मेरी सनका निर्मुल नस्ट हो गये और आज में भी समझ गया कि पढ़ लिखके कोई कितना ही बड़ा पंडित बन जाये परन्तु आप जिससे गुरुदेव का सच्चन ना मिले तब-तब शास्त्रो का रहस्य समझना ना मुंकिन है जब-जब भगवान की कथा सुलते-सुलते मन पुलकित होने लगे शरीर रोमांचित होने लगे कंठ गद-गद होने लगे नेत्र सजल होने लगे मन पिगल रहा है परवु के चरित्रों में प्रभावित हैं तबी इस मन को समझाते रहे और इस मुर्ख और इस पापी शरीर और इस मन के बहिकावे में ना आए जब भागने की कोशिश करे आज मेरा भचन करने का मन नहीं तो इसे खुब डाटो इसे खुब चिलाओ और इस मन के बहिकावे में ना आए श्रिष तुलसिदास जी ने सट कहे कर मन को समभोधित करते हैं कथा का यही चमतकार है कि मन बहुत जल्दी प्रभावित होता है तबी मन को समझाओ योग मारग में अपनी चिच रत्ती को रोपना इतना सामान्य नहीं है बहुत कठीन है इसलिए भगवान का यह चरित बहुत ही सुगम माध्यम है नारज जी ने कहा गंगा के तथ हरिद्वार में कथा होनी चाहिए सनकादियों के साथ नारज जी हरिद्वार में पदारे रिशी मुनियों को पता चला तो वो भी दोड़े दोड़े पदारने लगे बुरुगी जी भी दोड़े दोड़े चले आ रहे है बुरुगू जी अपने साथ में कई दूसरे लोगों को भी पकड़ पकड़ कर ले कर आ रहे है उनका मानना ऐसा था कि मैं जितने अज्यानी या ऐसे लोगों को पकड़ कर ले कर आओ जिनका जीवन मेरे कारण थोड़ा भी सुधर पाए और भगवत चेंतन में लग जाये उसका कुछ शत प्रति शत पुन्ण मुझे भी प्राप्त होगा इसलिए बुरुगू जी सभी को पकड़ पकड़ कर ले कर आ रहे है गुरुत्वा तत्र नाय तान भुरुगू संभोद चान यत कुमारवं दिदा सरवे निर्शेदू करश्न तत्तरा विशाल संत समुदाई गंगा के तथ हरिद्वार में एककरित हो गया बालो के वेदी बना कर संकाधियों को विराज्मान कर दिया गया तथा कथा प्रारंब होती है चारो तरख जै जै कार हो रही है फूलो की वर्षा होने लगी आकाश में विवानों पर बेट कर देवतागण आनंदित हो रहे है जै शब्दो नमः शब्द शंख सद्धव तथेव चचुन लाजा प्रसुनाना निक्षेप सुम्हान भूत भगवान की कथा सदेव शर्ट करने योगे है कोई दिन महुरत की आवशक्ता नहीं है जब चाहे जब सुनो इसके श्रवन से सदेव शरी हरी रिदै में निवास करते हैं सदाव सेवया सदाव सेवया श्रीमद भागवती कथा यस्यः श्रवन मातरेन हरिषे चितं समाश्रेत बहुत से शास्त्रों को सुनने से कोई फाइदा नहीं केवल ब्रहम पेदा होता है मुक्ति प्रदान के लिए केवल एक मातर श्रीमद भागवत ही सदेव गर्जना करता रहता है हजारो अश्वमेक यज्य सेकडो बाजपय यज्य इस शुक सास्त्र की कथा का सोलवा अंच की बराबरी भी नहीं कर सकता फल की दरश्टी से श्रीमद भागवत की समता गंगा गया काशी पुषकर या प्रया कोई तिर्थ भी नहीं कर सकता ना गंगा ना गया काशी पुषकरम ना प्रया गंगम शुक सास्त्र कथायाच फलेन समताम नयत संकादी कहते हैं रिश्यो जो पुरुष निरंतर अर्थ सहीद श्रीमद भागवत शास्त्र का परायन करता है उसके करोडो जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है इसमें कोई संदेह नहीं जो मनुष इस श्रीमद भागवत को स्वर्ण के सिहासन पर रक्कर ब्राम्मन को दान करता है वह अवश्य ही भगवान का परंप्रय होता है उसके घर में कभी दरीत्रिता प्रवेश नहीं करती है हेम सीह युक्तम चेतद वेशन वायद दाती च त्रशनेन सहसायु चमसे पुमान लगते ध्रूबं सनकादी कहते हैं जो मानव देह पाकर ऐसा लाब नहीं लिया वह बहुत बड़ा अभागा है ऐसे अभागियों को सनकादियों ने भैंकर गालियां सुनाई सनकादियों ने नारज जी संसार में जो मानव देह पाकर भागवत लाप नहीं ले सका वह अभागा है सनकादियों ने ना जाने कितनी ही गालियां दियें नारज जी ने कहा आप इतनी गालियां क्यों दे रहे हैं महराज सनकादियां बोले हम गालियां नहीं दे रहे हैं मेवं मन्दन्ती दीवी देव समाज मोक्या ये सारा देव समाज कह रहा है जो विमान में च्छाएं हैं देवतां जब देखते हैं तो ललाईत होते हैं कथा सुनने के लिए शुक्देव जी ने फटकार कर भकार दिये थे परन्तु जिनको सुलब हो सकी है वो उसका लाब नहीं लेते देवतां उन्हें गालियां देते हैं देखों कितने मन्द भागी हैं पास में अमरत बहर रहा है फिर भी वह वहां तक पहुश नहीं सकते सनकादी भागवत की महिमा गाय जा रहे थे अचानक संकिर्टन की द्वनी सुनाई देने लगी सभी श्रोता चोपन्य होकर देखने लगे की क्या दिखाई पड़ा भागती हसुतो तो तरुनो ग्रहित्वा प्रेमे करूप असहासा वीरासिद चित श्री क्रश्न गुविन्द हरे मुरारी ना थेती ना माने मुहर्वन्दती अचानक श्री भकती माराणी अपने पुत्रों के सहित नर्च्य करती हुई श्रोताओं के बीच प्रकट हो जाती है बागवत का महात्म सुनकर जुम उठे और उन्हें देखकर नारच जी को बड़ा हर्च हुआ उन्हें विश्वास हो गया कि मेरे वचन की रक्षा अवश्य हो जाएगी सभी महात्माओंने भकती माराणी के साथ मिलकर संकिर्टन करते हुए जुमने लगे राम नाम के साबुन से जो मन का मेल मिटाएगा निर्मल मन के तरपण में तु राम का दरशन पाएगा नारच जी ने भकती माराणी को प्रणाम किया और भकती माराणी ने संकाधियों को प्रणाम किया और निवेदन किया हे महात्मन आपके इस कथा के प्रभाव से हमारे पुत्र संपुर्ण स्वस्थ हो चुक्या है अब मैं बेटकर कथा सुनना चाहती हूँ आप बताईए कहाँ पर बेटो संकाधी बोले देवी ये जितरे शोता बेटे हैं तुम इन सभी के रिदे में जाकर विराजमान हो जाओ क्योंकि जिनके रिदे में भकती का वास हो जाए फिर उस भकती को भगवान के पीछे नहीं लगना पढ़ता है भगवान ही उस भकत के पीछे पढ़ जाते हैं क्योंकि भकती महाराणी भगवान की प्राण प्रिया है भकती के भगवान भी भकती के दिवाने गुलिये राधे राधे

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