09:14

Inner Freedom | आंतरिक स्वतंत्रता

by Parull Tewari

Rated
5
Type
guided
Activity
Meditation
Suitable for
Everyone
Plays
4

यह ध्यान साधना आपको उस स्वतंत्रता से जोड़ने के लिए है जो बाहर नहीं, आपके भीतर निवास करती है। श्वास और सजगता के माध्यम से यह अभ्यास आपको डर, दबाव और भीतरी संघर्ष से थोड़ा विराम लेने का अवसर देता है, ताकि आप उस शांत शक्ति को महसूस कर सकें जो हमेशा आपके साथ रही है। जब भी मन बँधा हुआ या थका हुआ लगे, इस साधना में लौट आएँ। सच्ची स्वतंत्रता यहीं है — आपके भीतर। Music by White Records

Inner FreedomSelf AcceptanceBreath AwarenessEmotional ResilienceMindfulnessBody AwarenessMind Wandering Management

Transcript

आंतरिक स्वतंत्रता एक ध्यान साधना आराम से बैठ जाएं या लेट जाएं जहां भी हैं अपने शरीर को थोड़ा और सहारा देने दें जैसे आज आपको कहीं पहुँचना नहीं है,

कुछ बनना नहीं है चाहे तो आखें धीरे से बंद करे नाक से एक गहरी सांस अंदर ले और धीरे धीरे सांस बाहर छोड़े जैसे सांस के साथ दिन का भार शरीर से उतर रहा हो अकसर हम स्वतंत्रता बाहर खोजते हैं पर कई बार वो उस शण में जनम लेती है जब हम खुद को कस कर जक्डे रहना छोड़ देते हैं ध्यान अपनी सांस पर ले आए ये सांस आपसे कुछ नहीं मांगती ये आपको कहीं पहुँचने को नहीं कहती बस आती है और चली जाती है और हर बार आपको एक नया अफसर देती है यदि मन भटके तो स्वेम को डाटने की जरूरत नहीं बस कुमलता से ध्यान को वापस ले आए अब अपने भीतर देखें क्या आपको अपने जीवन का वह शण याद आता है जब आप खुद को असहाई,

डरा हुआ या बंधा हुआ महसूस कर रहे थे शायद वह एक बाचीत थी जिससे आप बचना चाहते थे शायद एक निर्णे जिससे लेने की आपमें हिम्मत नहीं बची थी या शायद पस एक ऐसा समय जब आप चुप रहे जब भीतर सब कुछ कहना चाहता था उस पल को फिर से जीने की ज़रूरत नहीं बस ये याद रखे आप वहां से आगे बढ़े शायद कापते हुए,

शायद रोते हुए शायद बिना पूरी तरे समझे हुए पर आप रुके नहीं और उसी शण जब हालात नहीं बदले थे आप भीतर से थोड़े और मुक्थ हो गए ये याद आपकी शक्ती है ये प्रमाण है कि स्वतंतरता कभी-कभी डर के खतम होने से नहीं पलकी डर के साथ चलने से जनम लेती है एक गहरी सांस ले और सांस छोड़ते हुए ये जाने जो शक्ती तब आपके भीतर थी वह आज भी यही है ना तूटी हुए ना कमजोर बस शान्त स्वतंतरता हर बंधन तूट जाने का नाम नहीं कई बार वह इस अनुमती में छुपी होती है कि जो है उसे अभी जैसा है वैसा रहने दिया जाए इस शर में आप से कोई अपेक्शा नहीं आपको खुद को साबित नहीं करना आपका होना ही परियाप्थ है अब ध्यान दे शरीर शायद थोड़ा नरम है सांस थोड़ी खुली है यही है भीतर की स्वतंतरता शान्त,

सची और बिना शोर के धीरे धीरे ध्यान को वापस लाए शरीर का एहसास ले जमीन से जुड़ा हुआ,

संगला हुआ और अपने साथ ये स्मृति रखे स्वतंतरता कोई दूर की अवस्था नहीं वह हर उस शण में प्रकट होती है जब मैं डर के बावजूद खुद के साथ खड़ी होती हूँ धान्यवाद इस पल के लिए

Meet your Teacher

Parull TewariIndia

More from Parull Tewari

Loading...

Related Meditations

Loading...

Related Teachers

Loading...
© 2026 Parull Tewari. All rights reserved. All copyright in this work remains with the original creator. No part of this material may be reproduced, distributed, or transmitted in any form or by any means, without the prior written permission of the copyright owner.

How can we help?

Sleep better
Reduce stress or anxiety
Meditation
Spirituality
Something else